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जैन धर्म

जैन धर्म एक प्राचिन धर्म जैन धर्म  हा जगातील एक प्रमुख धर्म आहे. हा प्राचीन भारतीय धर्म असून त्याचे पुनरुज्जीवन या युगात प्रथम तीर्थंकर श्री रिषभदेवांनी केले. लोकसंख्येच्या दृष्टीने हा भारतातील सहाव्या क्रमांकाचा धर्म आहे. हा धर्म वैदिक परंपरेनरूप व वैदिक परंपरेसारखा प्राचीन आहे. हा धर्म वैदिक परंपरेतून उदयाला आलेला असून तो एक स्वतंत्र धर्म मानला जातो. अतिप्राचीन धर्म असलेला जैन धर्म हा लोकशाही विचार मूल्य असलेला भारतातील महत्त्वाचा धर्म आहे. या धर्माने समता, स्वातंत्र्य आणि न्याय या विचारांचा पुरस्कार केलेला आहे. 'जगा आणि जगू द्या' या विचारांवर जैन धर्माचे तत्त्वज्ञान आधारलेले आहे. अनेकांतवाद हा जैन धर्मातील महत्त्वाचा विचार आहे, की जो मानवी कल्याणाचा पुरस्कार करतो. मानवतेच्या कल्याणासाठी सतत जागृत राहून कार्य करण्याचे अभिवचन हे अनेकांतवादामधून दिले गेलेले आहे. जैन धर्माचे अधिक सोप्या भाषेमध्ये विश्लेषण करण्याचे काम हे महावीरांनी केले. ते जैन धर्मातील चोविसावे तीर्थंकर होते. सम्यक दृष्टी असलेला अनेकांतवाद अधिक स्पष्टपणे मांडण्याचे काम त्यांच्या काळामध्ये झाले. जैन धर्माला काही...

पारीकुपार लिंगो

पारीकुपार लिंगो गुरु पारिकुपार लिंगो का जन्म उस समय हुआ था जब मानव समाज प्रकृती के न्याय और नियमो से अनभिज्ञ था और वह सिर्फ अन्धकार के ओर ही बढ रहा था ।ऐसे कठिन समय मे उन्होने मानव-समाज मे ज्ञान की ज्योती जलाकर गोंडी धर्म 'कोया पुनेम' की संस्थापना करके पूरे समाज को नयी दिशा प्रदान की । लिंगो पुनेम के पांच सर्वोच्च मर्ग सुर्वेय मारेग आन्दगे मावा सगा पुनेम सुर सर्रि । । सुर्वेय नंगे आंदुने मावा सगा नंगे सुर सर्रि । । सुर्वेय ताकय आन्दुने मावा सगा ताससुर सर्रि । । सुर्वेय मोद आन्दुने मावा सगा मोद सुर सर्रि । । सुर्वेय सेवाय आन्दुने मावा सगा सेवा सू सर्रो । । लिंगो ने पांच सर्वोच्च मार्ग बत्तये है जो इस प्रकार है- 1 सत्य धर्म मार्ग -मानव समाज का सार्वगीन विकाश सुख व शान्ती से सामाजिक जिवन प्राप्त करानेवाला मार्ग ही सगा धर्म मार्ग है । 2 सत्य निति मार्ग - सगा सामाजिक नियमो का पालन करना 3 सत्य मार्ग - समाज को लाभदायक आचार -विचार को जानना और उनका पालन करना ही सत्य मार्ग है । 4 सत्य (सगा) ज्ञान मार्ग - जिन प्राकृतिक मूल्यो पर सामाजिक संरचना आधारित है,उन्हे समझकर उनके अनुसार व्यवहार करन...

केसमुत्ति सुत्त

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केसमुत्ति सुत्त केसरिया स्तूप  -  गौतम बुद्ध  ने सम्भवतः यहीं अपना  उपदेश  दिया था। केसमुत्ति सुत्त  या  कालाम सुत्त   तिपिटक  के  अंगुत्तर निकाय में स्थित  भगवान बुद्ध  के  उपदेश  का एक अंश हैं।  [1]   बौद्ध धर्म  के  थेरवाद  और  महायान सम्प्रदाय  के लोग प्रायः इसका उल्लेख बुद्ध के 'मुक्त चिन्तन' के समर्थन के एक प्रमाण के रूप में करते हैं।{ [2]  केसमुति सुत्त अधिक बड़ा नहीं है, किन्तु इसका अत्यन्त महत्त्व है। केसमुत्तिसुत्त के अन्य भाषाओं में नाम इस प्रकार हैं- पालि  : कालाम् सुत्तं या केसमुत्तिसुत्तं संस्कृत  : कालाम सूत्रं बर्मी भाषा  : कलम थोके या केथमोत्ति थोके थाई  : กาลามสูตร, कलम सुत् या केसमुत्ति सुत्त परिचय संपादित करें प्रसंग संपादित करें एक बार भगवान बुद्ध अपने विशाल भिक्खुसंघ सहित  कोसल  जनपद में चारिका करते हुए केस-मुत्त (केश-मुक्त) नामक कालामों के निगम में पहुँचे। कालाम लोग भगवान बुद्ध के सुयश को पहले से ही अच्छी तरह से जानते थे ( इति...

अंगुत्तरनिकाय

अंगुत्तरनिकाय त्रिपिटक     विनय पिटक                                                 सुत्त- विभंग खन्धक परि- वार                         सुत्त पिटक                                                                दीघ निकाय मज्झिम निकाय संयुत्त निकाय                                                              ...

सुत्तपिटक

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सुत्तपिटक Adarsh sinha Adarsh sinha त्रिपिटक     विनय पिटक                                                 सुत्त- विभंग खन्धक परि- वार                         सुत्त पिटक                                                                दीघ निकाय मज्झिम निकाय संयुत्त निकाय                                                         ...